चंदा कोचर HDFC‑ICICI विलय: क्या सच में ICICI की पूर्व CEO ने HDFC को खरीदने का सुझाव दिया?
यह सवाल कई महीनों से चर्चा में रहा है, और हाल ही में दीपक पारेख खुलासा करते हुए सामने आए। अपने नए इंटरव्यू में, HDFC समूह के पूर्व चेयरमैन ने इस बात की चुप्पी तोड़ी कि चंदा कोचर ने कई वर्ष पहले इन दोनों दिग्गज संस्थाओं के विलय का मसाला उठाया था
चंदा कोचर ने दिया था यह विलय सुझाव
चंदा कोचर, जिन्होंने ICICI बैंक की बागडोर संभाली थी, एक बातचीत के दौरान दीपक पारेख को कह गईं — “ICICI ने HDFC शुरू किया था, तो फिर वापस क्यों ना ‘घर’ लौट आओ?” .
इस प्रस्ताव को पारेख ने बाद में स्विकार नहीं किया, क्योंकि उन्हें लगा कि उनकी प्रतिष्ठा और HDFC की पहचान को यह उचित नहीं लगेगा ।
क्यों DIPAK ने किया सुझाव अस्वीकार
पहरेख ने स्पष्ट कहा कि “यह उचित नहीं होगा”—उनके अनुसार यह उनके ब्रांड और संस्थागत प्रतिष्ठा के अनुकूल नहीं था।
उन्होंने खुलासा किया कि उस समय यह विषय सिर्फ एक बात तक ही सीमित रहा, और सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा नहीं बना।
HDFC‑HDFC Bank उल्टा विलय था “नियामकीय मजबूरी”
हालाँकि आज हम ICICI‑HDFC merger suggestion की चर्चा कर रहे हैं, लेकिन असली कहानी तो HDFC‑HDFC Bank के उल्टे विलय की है जिसे जुलाई 2023 में पूरा किया गया ।
पारेख ने बताया कि यह किसी वयापारिक महत्वाकांक्षा का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह RBI द्वारा बढ़ते हुए जोखिम और प्रस्तावित परिसंपत्ति सीमा (₹5 लाख करोड़ से ऊपर) के कारण एक नियामक कदम था ।
विलय पर पारेख की भावुक प्रतिक्रिया
जब यह सौदा निष्कर्ष पर पहुँचा, तो पारेख ने कहा: “वह एक दुखद दिन था और साथ ही खुशी का दिन”—इस विलय से संस्था को मजबूती मिली और यह देश के लिए भी फायदेमंद साबित हुआ क्योंकि बड़े बैंक वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर मुक़ाबला कर सकते हैं ।
HDFC‑HDFC Bank विलय से आगे की राह
पारेख ने आगे कहा कि भारतीय बैंकों को मजबूत बनने के लिए विलय और अधिग्रहण की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे — यह कदम HDFC‑HDFC Bank reverse merger जैसी रणनीतियों को प्रेरित करता है ! उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, व्यापार नीतियों और निर्यात की अनिश्चितता बैंकिंग क्षेत्र के लिए प्रमुख चुनौतियाँ बन सकती हैं।
निष्कर्ष
- चंदा कोचर ने वाकई में वर्षो पूर्व चंदा कोचर HDFC‑ICICI विलय प्रस्ताव रखा था, और यह पहली बार खुलकर सामने आया है।
- दीपक पारेख खुलासा के अनुसार उन्होंने इसे सही नहीं समझा और अस्वीकार कर दिया।
- वास्तविक विलय नियामक मजबूरी की वजह से HDFC Bank के साथ संपन्न हुआ, न कि किसी रणनीतिक मंशा से।
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