साल 2025 में रिलीज़ हुई तमिल फिल्म Asthram उन चुनिंदा फिल्मों में से एक है जो क्राइम, मनोवैज्ञानिक थ्रिल और इन्वेस्टिगेशन का एक अनूठा मिश्रण पेश करती है। यह फिल्म अपना वातावरण पहले ही दृश्य से तैयार कर देती है और धीरे-धीरे दर्शक को ऐसे रहस्य में उलझाती है जिसमें हर मोड़ पर एक नया सवाल जन्म लेता है। फिल्म में लीड रोल में Shaam हैं, जो लंबे समय बाद एक गंभीर और परिपक्व किरदार के साथ स्क्रीन पर लौटे हैं। उनके साथ Niranjani ने भी अपनी उपस्थिति से अच्छा प्रभाव छोड़ा है। फिल्म का निर्देशन Aravind Rajagopal ने किया है, जो अपनी डेब्यू फिल्म के साथ ही अपनी शैली दर्शकों के सामने रखने में सफल रहते हैं।
कहानी की शुरुआत: एक साधारण केस या कुछ ज़्यादा?
Asthram की कहानी शुरू होती है एक ऐसे इंस्पेक्टर से, जो मेडिकल लीव पर होते हुए भी एक बेहद अजीब और परेशान कर देने वाले केस में खिंच जाता है। शहर में लगातार कुछ ऐसी घटनाएँ सामने आ रही हैं जिन्हें देखने पर हर कोई यही मानता है कि ये आत्महत्याएँ हैं। लेकिन समस्या यह है कि उनमें कुछ समानताएँ हैं, और ये समानताएँ साधारण नहीं हैं।
हर मृतक ने मरने से पहले खुद को चाकू से गोदा है — और वह भी एक खौफनाक तरीके से। प्रथम दृष्टि में यह समझ पाना मुश्किल है कि कोई इंसान खुद को इतनी क्रूरता से चोट कैसे पहुँचा सकता है। लेकिन जो चीज़ इस केस को और भयावह बनाती है, वह है मृतकों के बीच एक साझा रुचि — शतरंज (chess)। पुलिस को एक ऐसा पैटर्न मिलता है जो इसे साधारण आत्महत्या नहीं रहने देता।
रहस्य की गहराई: एक पुरानी किताब और छिपे हुए संकेत
जैसे-जैसे इंस्पेक्टर गहराई में जाता है, कहानी और उलझती जाती है। कुछ घटनाओं के दौरान उसे एक रहस्यमय पुरानी किताब मिलती है। यह किताब सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं बल्कि ऐसा लगता है मानो अपने भीतर कुछ अजीब, लगभग डरावने रहस्य छिपाए हुए हो। किताब में लिखी बातें और मृतकों की गतिविधियों का आपस में जो संबंध निकलता है, वह इस केस को पूरी तरह से मोड़ देता है।
यही वह हिस्सा है जहाँ फिल्म मानसिक थ्रिलर का रूप ले लेती है। कहानी दिखाती है कि कैसे इंसान की सोच, विश्वास और डर को मोड़कर उसे ऐसा रास्ता दिखाया जा सकता है जहाँ वह खुद अपने खिलाफ खड़ा हो जाए।
किरदारों की दुनिया और Shaam का प्रदर्शन
फिल्म का केंद्र Shaam का किरदार है, जो एक तनावग्रस्त, अनुभव-समृद्ध लेकिन भावनात्मक रूप से घायल पुलिस अधिकारी है। उसकी आँखों में डर, उलझन और जिम्मेदारी तीनों एक साथ दिखाई देते हैं। वह दर्शकों को ऐसा महसूस कराता है जैसे वे भी उसके साथ-साथ हर सुराग को जोड़ने की कोशिश कर रहे हों।
Niranjani का रोल छोटा जरूर है लेकिन प्रभावशाली है। वह कहानी का वह तत्व हैं जो इंस्पेक्टर की निजी दुनिया को दर्शकों के सामने लाते हैं — दिखाते हैं कि एक पुलिस अधिकारी सिर्फ केस से नहीं, बल्कि उससे जुड़े दबावों और निजी संघर्षों से भी जूझता है।
फिल्म का माहौल और निर्देशन
डायरेक्टर Aravind Rajagopal ने फिल्म का टोन शुरुआत से ही गंभीर और रहस्यमय रखा है। उनका उद्देश्य दर्शकों को एक journey पर ले जाना है जहाँ हर कदम अनिश्चित है। बैकग्राउंड म्यूजिक, साउंड डिजाइन और कैमरा वर्क इस रहस्य को और गहरा बनाते हैं। कई बार फिल्म अपनी धीमी रफ्तार के कारण भारी महसूस होती है, लेकिन यह कहानी का हिस्सा है — इसकी धीमे-धीमे खुलती परतें ही इसे engaging बनाती हैं।
फिल्म की मजबूती और कमज़ोरियाँ
Asthram की सबसे बड़ी ताकत इसका वातावरण, कहानी का अंदाज़ और Shaam का प्रदर्शन है। फिल्म दर्शक को सोचने पर मजबूर करती है और एक अच्छा थ्रिलर माहौल बनाकर रखती है।
लेकिन कुछ जगह फिल्म थोड़ी खिंची हुई लगती है, खासकर दूसरे हिस्से में। कुछ दर्शकों को climax थोड़ा तेज़ या कम प्रभावी लग सकता है। लेकिन फिर भी, एक डेब्यू डायरेक्टर के लिए यह एक साहसी और मजबूत प्रयास है।
क्या Asthram देखनी चाहिए?
अगर आपको क्राइम-थ्रिलर, इन्वेस्टिगेशन और मनोवैज्ञानिक रहस्य वाली फिल्में पसंद हैं, तो Asthram आपके लिए एक अच्छा विकल्प है। यह फिल्म सिर्फ एक रहस्य को सुलझाने की कहानी नहीं है बल्कि यह दिखाती है कि इंसान का मन कितना पेचीदा और संवेदनशील होता है। इसके गंभीर माहौल, दिलचस्प क्लूज़ और अदाकारी इसे एक बार देखने लायक जरूर बनाते हैं।