Baramulla Movie Review – एक डर, रहस्य और दर्द की अनकही कहानी

Baramulla, 2025 में रिलीज़ हुई एक सुपरनैचुरल हॉरर-थ्रिलर फिल्म है, जिसे निर्देशक आदित्य सुहास जांभाळे ने बनाया है। फ़िल्म में मुख्य भूमिका में मनव कौल और भाषा सुम्बली हैं। यह फिल्म कश्मीर की खूबसूरत लेकिन दर्दभरी वादियों में सेट की गई है और हॉरर के ज़रिए उस घाटी के इतिहास और भावनाओं की कहानी बयां करती है।

Baramulla सिर्फ एक हॉरर फिल्म नहीं है, बल्कि यह स्मृतियों, खोने के दर्द और अनसुलझे रहस्यों का मिला-जुला अनुभव है। फ़िल्म ने अपनी अलग कहानी, बेहतरीन अभिनय और कश्मीर की सर्द, खामोश फिज़ाओं को जिस तरह पर्दे पर उतारा है, वह दर्शकों को भीतर तक छू जाता है।


कहानी का सार – डर की परतों में छुपा रहस्य

कहानी शुरू होती है DSP रिदवान सैयद (मनव कौल) से, जिनकी तैनाती अचानक बर्फ से ढके Baramulla क्षेत्र में कर दी जाती है। यह इलाका शांत तो दिखता है, लेकिन इसकी खामोशी के भीतर कई दर्दनाक राज़ छिपे हुए हैं। रिदवान यहां एक छोटे बच्चे के रहस्यमयी तरीके से लापता होने की जांच शुरू करते हैं।

जांच आगे बढ़ती है तो उन्हें यह समझ आता है कि मामला सिर्फ गायब होने का नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ अलौकिक शक्तियाँ, पुरानी त्रासदियाँ और दबी हुई यादें जुड़ी हैं।

फ़िल्म में रिदवान के अपने घर में भी अजीब घटनाएँ होती हैं—दरवाजों का अपने आप खुलना, परछाइयों का दिखना, और रात की खामोशियों में डरावनी आवाजें। इन घटनाओं का उसकी निजी जिंदगी और केस दोनों से कोई न कोई संबंध ज़रूर है।

धीरे-धीरे फिल्म एक बड़े रहस्य की ओर बढ़ती है, जहां कश्मीर के अतीत, उसके दर्द और लोगों की मानसिक अवस्था को भी कहानी में जोड़ दिया जाता है।


फ़िल्म की विशेषताएँ

1. दमदार अभिनय

मनव कौल फिल्म की रीढ़ हैं। उनका गंभीर, भावनात्मक और परिपक्व अभिनय किरदार को गहराई देता है। भाषा सुम्बली का रोल छोटा होते हुए भी प्रभावी है।

2. कश्मीर का खूबसूरत और डरावना माहौल

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका लोकेशन है।
बर्फ से ढके जंगल, सुनसान घर, धुंधले रास्ते और Jhelum नदी के इर्द-गिर्द फिल्माए गए दृश्य इसे बेहद आकर्षक और रहस्यमयी बनाते हैं।

कश्मीर का प्राकृतिक सौंदर्य यहाँ हॉरर का हिस्सा बन जाता है – एक शांत जगह का भीतर से टूटा होना कहानी को और दमदार कर देता है।

3. हॉरर + इमोशन का नया मिश्रण

Baramulla सिर्फ डराने के लिए नहीं बनाई गई है। यह हॉरर को एक प्रतीक की तरह इस्तेमाल करती है—जो इंसानी दर्द, बिछड़ने, ग़म और अधूरी यादों को दर्शाता है।
कहानी कई बार भावुक भी करती है, खासतौर पर जब रिदवान अपने पुराने फैसलों और दर्द से जूझते हैं।


कमियां

1. फिल्म का धीमा पहला हिस्सा

फ़िल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी लग सकती है। निर्देशक वातावरण बनाने में समय लेते हैं, जो कुछ दर्शकों को लंबा लग सकता है।

2. पारंपरिक हॉरर की कमी

यह फिल्म शुद्ध हॉरर नहीं है। Jump-scare या तेज़ डराने वाले दृश्य बहुत कम हैं।
जो दर्शक सिर्फ डर के लिए फिल्म देखते हैं, उन्हें यह ज्यादा ‘मनोवैज्ञानिक’ लग सकती है।

3. अंत थोड़ा जटिल

फ़िल्म के आखिरी 20 मिनट में बहुत कुछ एक साथ सामने आता है, जिससे कहानी थोड़ी उलझी हुई महसूस होती है।


क्यों देखें Baramulla?

अगर आप ऐसी फिल्में पसंद करते हैं जिनमें:

  • गहरी कहानी हो
  • मनोवैज्ञानिक हॉरर का स्पर्श हो
  • कश्मीर जैसी जगह की भावनात्मक पृष्ठभूमि हो
  • रहस्य परत-दर-परत खुलता हो

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