5 खिलाड़ी जिन्होंने आखिरी मैच में किया कमाल, लेकिन दोबारा नहीं मिली जगह
क्रिकेट की दुनिया अनिश्चितताओं से भरी हुई है। कई बार खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद चयनकर्ताओं की योजनाओं में फिट नहीं बैठते और उन्हें टीम से बाहर कर दिया जाता है। भारतीय क्रिकेट में भी ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं, जब खिलाड़ियों ने अपने आखिरी इंटरनेशनल मैच में बेहतरीन प्रदर्शन किया, लेकिन फिर कभी उन्हें टीम इंडिया की जर्सी पहनने का मौका नहीं मिला। आइए नज़र डालते हैं ऐसे 5 खिलाड़ियों पर।
1. इरफान पठान
टीम इंडिया के स्विंग गेंदबाज और बेहतरीन ऑलराउंडर इरफान पठान का आखिरी T20I मुकाबला 2012 में श्रीलंका के खिलाफ था। उस मैच में उन्होंने नई गेंद से विकेट निकाले और किफायती गेंदबाज़ी की। प्रदर्शन अच्छा होने के बावजूद उन्हें आगे मौका नहीं मिला। सेलेक्टर्स ने उन्हें पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया और उनका करियर अचानक खत्म हो गया।
2. वीरेंद्र सहवाग
टीम इंडिया के ‘नवाब ऑफ़ नजरबाग’ वीरेंद्र सहवाग ने 2013 में आखिरी बार भारत के लिए खेला। अपने अंतिम वनडे मुकाबले में उन्होंने 30+ रन बनाए और शुरुआत शानदार की थी। टेस्ट में भी उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। लेकिन उम्र और फिटनेस कारणों से उन्हें बाहर कर दिया गया और वापसी का कोई मौका नहीं दिया गया।
3. लक्ष्मण शिवरामकृष्णन
80 के दशक में टीम इंडिया के लेग स्पिनर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने अपने आखिरी टेस्ट और वनडे में विकेट निकाले थे। उनका प्रदर्शन ठीक-ठाक था, लेकिन टीम मैनेजमेंट ने युवा खिलाड़ियों को तरजीह दी। इस वजह से उनका करियर 26 साल की उम्र से पहले ही खत्म हो गया।
4. मनोज तिवारी
मनोज तिवारी को हमेशा “अनलकी क्रिकेटर” कहा जाता है। 2011 में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ उन्होंने वनडे मैच में शानदार शतक जमाया था और ‘मैन ऑफ़ द मैच’ भी बने थे। लेकिन इसके बावजूद उन्हें लगातार मौके नहीं मिले। आखिरी इंटरनेशनल मैच में भी उनका प्रदर्शन बुरा नहीं था, फिर भी उन्हें दोबारा टीम में जगह नहीं दी गई।
5. आरपी सिंह
2007 टी20 वर्ल्ड कप जीत के हीरो आरपी सिंह ने 2011 में आखिरी बार टीम इंडिया के लिए खेला। इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने विकेट भी चटकाए थे, लेकिन सेलेक्टर्स ने उन्हें टीम से बाहर कर दिया। बाद में भुवनेश्वर कुमार और अन्य तेज़ गेंदबाजों को मौका दिया गया।
आखिरी मैच में क्यों नहीं मिली जगह?
कई बार खिलाड़ी अच्छा खेलते हैं, लेकिन टीम चयन सिर्फ प्रदर्शन पर निर्भर नहीं होता। चयनकर्ता टीम के भविष्य, नए टैलेंट, फिटनेस और कॉम्बिनेशन पर भी ध्यान देते हैं। यही कारण है कि कई दिग्गज अपने आखिरी मैच में अच्छा करने के बावजूद टीम से बाहर हो गए।
इरफान पठान इसका बड़ा उदाहरण हैं। उन्होंने बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी दोनों से योगदान दिया था, लेकिन चोट और टीम बैलेंस की वजह से उन्हें नज़रअंदाज़ किया गया। वहीं मनोज तिवारी जैसे खिलाड़ी ने शतक लगाने के बाद भी लगातार बाहर बैठे-बैठे अपना करियर गंवा दिया।
फैंस की प्रतिक्रिया
इन खिलाड़ियों के करियर का अंत हमेशा फैंस को खलता रहा। क्रिकेट प्रेमियों का मानना है कि अगर सहवाग, इरफान या मनोज तिवारी जैसे खिलाड़ियों को कुछ और साल दिए जाते तो भारत और भी मजबूत टीम साबित हो सकता था। खासकर सहवाग और इरफान पठान जैसे खिलाड़ी बड़े टूर्नामेंट्स में भारत के लिए मैच विनर साबित हो सकते थे।
सोशल मीडिया पर भी अक्सर फैंस यह चर्चा करते हैं कि इन खिलाड़ियों को अचानक बाहर करना भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ा नुकसान साबित हुआ।
आज का परिदृश्य
आज भी भारतीय क्रिकेट में कई युवा खिलाड़ी अच्छा डेब्यू करने के बावजूद जल्दी बाहर हो जाते हैं। इसका कारण टीम में ज्यादा कॉम्पिटीशन और सीमित जगह है। ऐसे में खिलाड़ियों को लगातार फिट रहना और हर मौके को भुनाना बेहद जरूरी हो जाता है।
निष्कर्ष
इन खिलाड़ियों का आखिरी मैच यह साबित करता है कि वे टीम इंडिया के लिए उपयोगी हो सकते थे। लेकिन क्रिकेट में कई बार सिर्फ प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि उम्र, फिटनेस, टीम बैलेंस और भविष्य की योजनाएँ भी अहम होती हैं। यही कारण है कि इन खिलाड़ियों का करियर अचानक खत्म हो गया। अगर इन्हें और मौके दिए जाते तो शायद भारतीय क्रिकेट को और भी ज्यादा सफलता मिलती।