De De Pyaar De 2 (2025) Review – रिश्तों की नई उलझनें और पुराना कॉमेडी का तड़का

अजय देवगन, तब्बू और रकुल प्रीत स्टारर “De De Pyaar De 2” उन फिल्मों में से है जो रिश्तों की जटिलताओं को हल्के-फुल्के अंदाज़ में पेश करती हैं। 2019 की सफल फ़िल्म De De Pyaar De के इस सीक्वल में इमोशन, ह्यूमर और मॉडर्न रिलेशनशिप ड्रामा का वही blend देखने को मिलता है, जिसने पहले पार्ट को लोकप्रिय बनाया था। हालांकि इस बार कहानी का स्कोप बड़ा है और ड्रामा पहले से ज़्यादा layered है।

कहानी: पुराने रिश्तों में नई खटपट

De De Pyaar De 2 – कहानी वहीं से आगे बढ़ती है जहाँ पहला पार्ट खत्म हुआ था। आशीष (अजय देवगन) और आयशा (रकुल प्रीत) अब अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उम्र का फासला, परिवार की आपत्तियाँ और समाज की कड़वी नज़र — ये सब अभी भी उनके रास्ते में हैं।

दूसरी तरफ मंन्या (तब्बू) की जिंदगी भी बदल चुकी है। वह emotionally mature और independent दिखती हैं, लेकिन उनके भीतर अब भी कई अनकहे सवाल दबे हुए हैं — खासकर आशीष और आयशा के रिश्ते को लेकर।

जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, तीनों किरदारों की ज़िंदगी एक बार फिर एक-दूसरे से टकराने लगती है। फिल्म न सिर्फ रिश्तों में ईगो, insecurity और communication gap को दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि उम्र बढ़ने के बाद प्यार और companionship की ज़रूरत कैसे बदल जाती है।

परफॉर्मेंस: फिल्म की रीढ़

अजय देवगन

अजय फिर वही trademark deadpan comedy और emotional depth लेकर आते हैं। उनका character mature है, flawed है, लेकिन relatable है। कॉमिक सीन हों या emotional breakdown — दोनों में वे equally प्रभावशाली हैं।

रकुल प्रीत सिंह

रकुल का character इस पार्ट में ज्यादा grounded और emotionally strong है। उन्होंने काफी mature performance दी है और अजय के साथ उनकी chemistry भी natural लगी।

सपोर्टिंग कास्ट

जिम्मी शेरगिल, आलोक नाथ और कुमार मंगत के roles छोटे हैं, लेकिन ह्यूमर का अच्छा dose देते हैं। इनके scenes से फिल्म की pace हल्की-फुल्की बनी रहती है।

डायरेक्शन और राइटिंग

अनुभव सिंह के डायरेक्शन में फिल्म आधुनिक रिश्तों की practical complexities को समझने की कोशिश करती है। second half में drama बढ़ जाता है, लेकिन narrative कभी heavy नहीं लगता।

स्क्रीनप्ले में कुछ जगह repetition है, और कुछ scenes predictable भी महसूस होते हैं, लेकिन dialogue writing sharp है। कई lines सीधे दिल पर लगती हैं, खासकर वे जहां रिश्तों में age-gap romance पर societal judgment को दिखाया गया है।

संगीत और तकनीकी पहलू

गीत उतने iconic नहीं हैं जितने पहले पार्ट के थे, लेकिन 2–3 tracks कानों को अच्छे लगते हैं। background score scenes को सही भाव देता है।

Cinematography smooth है, और film visually appealing लगती है — खासकर London sequence और hill-station shots।

Editing crisp है, लेकिन second half में 10–15 मिनट की trimming से pace और tight हो सकता था।

कॉमेडी vs इमोशन – क्या बैलेंस बैठता है?

फिल्म का पहला भाग हल्का-फुल्का और fun है। कई scenes genuinely funny हैं — especially अजय और जिम्मी शेरगिल के बीच का असहज humour।

दूसरा भाग रिश्तों के emotional complexity पर ज्यादा केंद्रित है। यह हिस्सा गहरा है, mature है — और अपनी बात कहने में सफल भी।

भले ही कुछ scenes melodramatic लगते हैं, लेकिन overall film comedy और emotion का एक अच्छा संतुलन पेश करती है।

क्या फिल्म देखने लायक है?

हाँ, अगर आपको relationship-driven comedy-dramas पसंद हैं।
फिल्म के themes —

  • second chances in love
  • age-gap romance
  • divorce के बाद life
  • modern vs traditional values
    काफी relatable और present-day society के अनुसार हैं।

यह फिल्म उन सभी लोगों को पसंद आएगी जो दिल को छूने वाले हल्के ड्रामे के साथ meaningful संदेश भी चाहते हैं।

  • शानदार performances
  • solid emotional core
  • entertaining first half
  • कुछ predictable moments
  • अच्छी लेकिन ज्यादा लंबी कहानी

कुल मिलाकर De De Pyaar De 2” एक mature, emotional और entertaining film है, जो हंसी के साथ-साथ रिश्तों की उथल-पुथल को अच्छी तरह समझाती है। यह sequel आपके दिल को छूता है और चेहरे पर मुस्कान भी छोड़ जाता है

Leave a Comment