कौन हैं शुभांशु शुक्ला?
Shubanshu Shukla space mission भारत के लिए गर्व का क्षण बन गया है। शुभांशु शुक्ला, उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के रहने वाले हैं। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे शुभांशु का सपना था कि वह एक दिन अंतरिक्ष में जाएं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कानपुर से पूरी की और फिर IIT Bombay से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की।
इसके बाद शुभांशु ने ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) में वैज्ञानिक के रूप में कार्य शुरू किया। वहां उनकी मेहनत और लगन को देखते हुए उन्हें 2023 में गगनयान मिशन के मानव मिशन ट्रायल में शामिल किया गया।
मिशन की खास बातें
| मिशन का नाम | Gaganyaan-VYOM 1 |
|---|---|
| लॉन्च डेट | 28 जून 2025 |
| लॉन्च स्थान | श्रीहरिकोटा, भारत |
| स्पेसक्राफ्ट | Vyom-1 Capsule |
| मिशन अवधि | 7 दिन |
| कक्षा | Low Earth Orbit (400 km) |
| मुख्य दल | शुभांशु शुक्ला, कमांडर रोहित वर्मा, और डॉक्टर नेहा सिंह |
अंतरिक्ष में भारत की भूमिका
ISRO ने 2025 में Gaganyaan-VYOM 1 मिशन के तहत 3 भारतीय वैज्ञानिकों को पहली बार पूरी तरह देश में बने क्रू कैप्सूल से अंतरिक्ष भेजा।
इस मिशन का उद्देश्य न केवल मानव अंतरिक्ष यात्रा को स्थापित करना है, बल्कि यह दिखाना भी है कि भारत अब उस स्तर पर पहुंच गया है जहाँ उसे किसी विदेशी तकनीक की जरूरत नहीं।
Shubanshu Shukla space mission इस मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि रहे क्योंकि उन्होंने onboard प्रयोगों को सफलतापूर्वक संचालित किया।
शुभांशु की भूमिका और कार्य
- उन्होंने अंतरिक्ष में microgravity में मानव बॉडी पर पड़ने वाले प्रभाव पर शोध किया।
- Vyom Capsule में मौजूद life-support सिस्टम की निगरानी की।
- अंतरिक्ष में communication, thermal regulation और emergency drills पर परीक्षण किया।
परिवार और प्रेरणा
शुभांशु के पिता राजेंद्र शुक्ला, पेशे से शिक्षक रहे हैं और उनकी मां सावित्री देवी, गृहिणी हैं। उनका कहना है कि शुभांशु बचपन से ही रॉकेट और तारे देखकर सवाल पूछा करते थे:
“क्या मैं भी कभी वहां जा सकता हूं?”
आज वह सपना न केवल साकार हुआ है, बल्कि वह लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
प्रधानमंत्री और वैज्ञानिक समुदाय की प्रतिक्रियाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया:
“भारत का बेटा शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में पहुंचा – यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है।”
ISRO प्रमुख एस. सोमनाथ ने कहा,
“हमारे देश के युवाओं में इतनी क्षमता है कि आने वाले समय में भारत स्पेस सुपरपावर बनेगा। शुभांशु इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।”
देश के युवाओं के लिए संदेश
अंतरिक्ष यात्रा से लौटते समय, शुभांशु ने कहा:
“अगर आप बड़ा सोचते हैं, लगातार मेहनत करते हैं, तो कोई भी सपना दूर नहीं। मैं एक छोटे शहर से आया हूं, लेकिन अंतरिक्ष पहुंचा – आप भी कर सकते हैं।”
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ISRO के Gaganyaan मिशन और Vyom Capsule की विस्तृत जानकारी के लिए देखें: ISRO Gaganyaan Official
निष्कर्ष
Shubanshu Shukla space mission सिर्फ एक वैज्ञानिक की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की युवा शक्ति का प्रतीक बन चुका है। उत्तर प्रदेश से निकलकर अंतरिक्ष तक का यह सफर देश के हर कोने में बैठें युवाओं के लिए उम्मीद और आत्मविश्वास का स्रोत है।
अंतरिक्ष में भारत की अगली उड़ान को दिशा देने वाले शुभांशु जैसे वैज्ञानिकों पर हर भारतीय को गर्व है।